सट्टे की दीमक चाट रही है धनपुरी के युवाओं को, जिम्मेदार खामोश

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शहडोल. धनपुरी की गलियों में एक धीमी लेकिन खतरनाक दीमक अपने पाँव पसार चुकी है-नाम है सट्टा। ये कोई मामूली खेल नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को निगलने वाली लत बन चुकी है। नौजवानों की जेबें खाली हो रही हैं, घरों में तनाव बढ़ रहा है, और जिम्मेदार लोग खामोशी का कम्बल ओढ़े बैठे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट में स्थानीय नागरिक राकेश तिवारी ने तीखा प्रहार करते हुए लिखा: सट्टा धनपुरी के युवकों को दीमक की तरह खा रहा है, जिम्मेदार मौन। यह पोस्ट केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक ज्वलंत सच्चाई है जो हर मोहल्ले में महसूस की जा सकती है। कई युवाओं का भविष्य अंधकार में डूब रहा है, जबकि पुलिस और प्रशासन अभी तक किसी ठोस कार्रवाई से परे नजर आ रहा है।

युवाओं में बढ़ती बर्बादी:

स्कूल-कॉलेज के छात्र सट्टे की गिरफ्त में बेरोजगार युवा गलत रास्ते पर, घरेलू कलह और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ीं, सवालों के घेरे में जिम्मेदार: क्या प्रशासन को इस खतरे की भनक नहीं? क्या स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे यह धंधा नहीं फल-फूल रहा? आखिर कब तक युवाओं की जिंदगी यूँ ही जुए की आग में जलती रहेगी?

जनता की मांग:

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सट्टा माफिया पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह पूरे क्षेत्र की सामाजिक व्यवस्था को हिला सकता है। लोग सक्रिय अभियान, छापेमारी और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।धनपुरी की जनता जाग रही है, अब बारी प्रशासन की है। अगर जिम्मेदार फिर भी मौन रहे, तो आने वाले दिनों में यह चुप्पी बहुत महंगी पड़ सकती है।

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