

अनूपपुर. अनुपपुर जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर दूर खांडा क्षेत्र में संचालित डामर प्लांट से लगातार उठता काला धुआं अब आमजन के लिए जानलेवा बनता जा रहा है। राहगीरों का आना-जाना दूभर हो गया है और आसपास के ग्रामीणों में भी सांस संबंधी बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त प्लांट से निकलने वाला धुआं किसी भी प्रकार के प्रदूषण नियंत्रण उपायों के बिना ही खुलेआम वातावरण में छोड़ा जा रहा है। जबकि NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के नियमों के अनुसार किसी भी औद्योगिक इकाई को पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्य करना अनिवार्य है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो: सुबह और शाम को निकलना मुश्किल हो जाता है, धुएं के कारण आँखों में जलन और साँस लेने में तकलीफ होती है। स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों का कहना है कि कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रभावशाली ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते कार्यवाही ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।
बड़ा सवाल:
क्या इस प्लांट को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति मिली है? क्या इसका एनवायरमेंटल क्लीयरेंस है? क्या इसका कोई नियमित निरीक्षण हो रहा है? इन सवालों के जवाब तलाशना अब बेहद जरूरी हो गया है।
आमजन की मांग:
तत्काल प्रभाव से प्लांट पर रोक लगाई जाए या प्रदूषण नियंत्रण यंत्र लगाए जाएं। प्रदूषण बोर्ड एवं जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाए। दोषियों पर NGT एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए।यह मामला सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीने के अधिकार का है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब तक इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेता है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह घना काला धुआं पेड़ों के ऊपर से वातावरण में फैल रहा है, जिससे न केवल वायु प्रदूषण बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी को भी नुकसान हो रहा है।
